दोहरे तुलनपत्र की चुनौती क्या हैं ?और इसके समाधान के लिए कौन कौन से कदम उठाए जाने चाहिए ? चर्चा कीजिए |
निगमित क्षेत्र की विचाराधीन प्रतिम्बलित आस्तियां बेच दी जाए |
bankruptcy code में सुधर किया जाए
DRT को और सशक्त किया जाए ताकि बड़े सम्बंधित कॉरपोरेट्स को पकड़ा जाए |
एक स्वतंत्र आयोग बनाया जाए जो कठिन केस में बैंक व कॉर्पोरेट के बीच समस्या का निबटारा कर सके (renegotiate) कर सके |
सरकार उन आस्तियों को बेच सकती हैं जिसे वो धारण करने की इक्षुक नही हैं ,और बैंकों को पूंजी उपलब्ध करा सकती है |(इंद्रधनुष योजना )
सरकार बाजार से पूंजी उपलब्ध करा सकती हैं (Debt & equity के रूप में )|
RBI भी पूंजी उपलब्ध कराती हैं |
पूंजी उपलब्ध कराने में ये ध्यान रखना चाहिए कि जिन बैंकों के प्रदर्शन में सुधार हो रहा है उन्हें पुनः पूंजीकरण में प्राथमिकता दी जाए |
निजी क्षेत्र और कॉर्पोरेट क्षेत्र के आगामी प्रोत्साहनों को दुरुस्त किया जाए ताकि समस्याएं दुबारा न आए –लेकिन कैसे ?–
बैंकों की नई साखा खोली जाए |
नए प्रकार के बैंक खोले जाए (स्माल बैंक , पेमेंट बैंक ,कस्टोडियन बैंक , होलसेल बैंक etc …)|
SLR को घटाया जाए ताकि बैंकों के पास ज्यादा पैसे हो व्यवसाय करने के लिए ,Priority Sector Lending में छूट दी जाए |
Corporate Bond Market को बढ़ावा दिया जाए ताकि कॉर्पोरेट सेक्टर की बैंकों पे निर्भरता कम हो |
दोहरे तुलनपत्र की चुनौती सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों और कुछ बृहत् कॉर्पोरेट घरानों की अनर्जक वित्तीय स्थितियां हैं|
बैंकिंग व्यवस्था की समस्याएं कुछ दिनों से बढ़ रही हैं |प्रतिबलित आस्तियां (अनर्जक ऋण पुनर्गठन और आस्तियों) में पिछले कुछ वर्षों से वृद्धि हो रही हैं जिसका प्रभाव पूंजीगत परिस्थितियों पर पड़ा हैं |बैंकों ने पूंजी संरक्षण के उद्देश्य से बाजार में ऋण के प्रवाह को सीमित किया हैं |
कुछ मामलों में तुलनपत्र की ये सुभेद्दयता कॉर्पोरेट क्षेत्र में देखे गए है विशेष रूप से अवसंरचना और वस्तु संबंधी व्यवसायों में जैसे इस्पात में निवेश करने हेतु ऋण लिए लेकिन बाजार की कमज़ोरियों की वजह से वो ऋण लौटा नही पाए |
दोहरे तुलनपत्र की चुनौती के समाधान —
बैंकिंग व्यवस्था की समस्याएं कुछ दिनों से बढ़ रही हैं |प्रतिबलित आस्तियां (अनर्जक ऋण पुनर्गठन और आस्तियों) में पिछले कुछ वर्षों से वृद्धि हो रही हैं जिसका प्रभाव पूंजीगत परिस्थितियों पर पड़ा हैं |बैंकों ने पूंजी संरक्षण के उद्देश्य से बाजार में ऋण के प्रवाह को सीमित किया हैं |
कुछ मामलों में तुलनपत्र की ये सुभेद्दयता कॉर्पोरेट क्षेत्र में देखे गए है विशेष रूप से अवसंरचना और वस्तु संबंधी व्यवसायों में जैसे इस्पात में निवेश करने हेतु ऋण लिए लेकिन बाजार की कमज़ोरियों की वजह से वो ऋण लौटा नही पाए |
दोहरे तुलनपत्र की चुनौती के समाधान —
मान्यता (Recoginition)–
बैंकों को अपने आस्तियों का मूल्य निर्धारण वास्तविक मूल्य के लगभग करना चाहिए |
समाधान (Resolution)–
पुनः पूंजीकरण (Recapitalize)–
सुधार(Reform)-
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